*मुक्त-मुक्तक : 748 - प्रभु-भक्ति है अकारथ










कुछ पाँव-पाँव तो कुछ 
गाड़ी से 
या चढ़े रथ ॥
सब धाम घूम आए , 
कर डाले 
सारे तीरथ ॥
पाया यही कि केवल 
प्रभु-भक्ति 
है अकारथ ,
होते यथार्थ कर्मों 
से ही 
सफल मनोरथ ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति



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