*मुक्त-मुक्तक : 744 - नहीं चाहता हूँ ॥



[ चित्रांकन : डॉ. हीरालाल प्रजापति ] 
न सचमुच जहाँ के तहीं चाहता हूँ ॥
कहीं और भी मैं नहीं चाहता हूँ ॥
न जन्नत न दोज़ख में रहने की ख़्वाहिश ,
जहाँ वो रहें घर वहीं चाहता हूँ ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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