*मुक्त-मुक्तक : 741 - आफ़्ताब बनना है ॥


न पूछो मुझसे क्या मुझको जनाब बनना है ?
किसी से सह्ल नहीं सबसे साब बनना है ॥
अगर हँसो न तुम तो सच्ची आर्ज़ू कह दूँ ?
चराग़ हूँ मैं मुझे आफ़्ताब बनना है ॥
(साब=कठिन,सह्ल=सरल,आर्ज़ू=मनोकामना,आफ़्ताब=सूर्य)
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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