*मुक्त-मुक्तक : 740 - जो बचा लेता ॥


टूटने - गिरने बिखरने से जो बचा लेता ॥
आँधियों में भी उजड़ने से जो बचा लेता ॥
उसको बोलूँ न ख़ुदा तो मैं और क्या बोलूँ ?
पीलूँ ज़हराब तो मरने से जो बचा लेता ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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