*मुक्त-मुक्तक : 734 - ज़िंदगी यह मौत सी......



सिर्फ़ दो या चार ही दम को मिली ॥
उसपे तुर्रा यह फ़क़त ग़म को मिली ॥
किस सज़ा को उस ख़ुदा से इस क़दर ,
ज़िंदगी यह मौत सी हमको मिली ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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