*मुक्त-मुक्तक : 730 - केले के छिलके:....


केले के छिलके को न फैली काई बना दो ॥
पतली दरार को न चौड़ी खाई बना दो ॥
संदेह के उत्तुंग पर्वतों को यदि हो शक्य ,
विश्वास से अपने मिटा या राई बना दो ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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