*मुक्त-मुक्तक : 729 - टाँगें उल्टी वो मोड़ता है.......


टाँगें उल्टी वो मोड़ता है न
 आँखों को ही वो फोड़ता ॥
ना उखाड़े वो चोंच ना 
गरदन मरोड़ के तोड़ता ॥
हम परिंदों का वो दुश्मन 
मारता हमको नहीं ,
बाँधकर पिंजरे में रखता या
 पर क़तर के ही छोड़ता ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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