*मुक्त-मुक्तक : 728 - भूल यही की कि.......



बिन्दु को जिसने कई बार सिन्धु समझा था ॥
सिन्धु को जिसने कई बार बिन्दु समझा था ॥
हमने भी भूल यही की कि बार - बार उसे ,
न समझना था समझदार किन्तु समझा था !!
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

Comments

Kavita Rawat said…
सुन्दर

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