*मुक्त-मुक्तक : नोकदार-सख़्ततर काँटे.......


कोई करके न तरफ़दारियाँ ये है बाँटे ॥
कोई अपने ही हाथों से न ख़ुद ये है छाँटे ॥
ख़ुद-ब-ख़ुद ही ये गिरते आके नर्म-दामन में –
बदनसीबी से नोकदार-सख़्ततर काँटे ॥
( तरफ़दारियाँ=पक्षपात, छाँटना=चुनना )
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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