*मुक्त-मुक्तक : 716 - बिना पिये ही चढ़ी......


बग़ैर ज़ीना 
बलंदी गले लगा चूमी !!
गली हर एक 
चले बिन ही जन्नती घूमी !!
वो आके बैठ गए क्या 
ज़रा सा पहलू में ,
बिना पिये ही चढ़ी 
ज़िंदगी नची-झूमी !!
( ज़ीना=सीढ़ी ,बलंदी=ऊँचाई ,जन्नती=स्वर्ग की ,पहलू=गोद )
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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