*मुक्त-मुक्तक : 714 - कच्ची मदी हूँ ॥


ओस कण दिखता हूँ पर 
बहती नदी हूँ ॥
रूप से अंगूर सच 
कच्ची मदी हूँ ॥
दृष्टिकोण अपना बदल लो 
पाओगे फिर ,
एक छोटा पल नहीं मैं 
इक सदी हूँ ॥
( मदी = शराब )
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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