*मुक्त-मुक्तक : 713 - मियादी सी आशिक़ी


मुझपे पहले ही ये बात 
उसने साफ़ कर दी थी ॥
ख़ास शर्तों पे 
मियादी सी आशिक़ी की थी ॥
ग़म नहीं आज अगर
 ग़ैर वो हुआ , उसने –
उम्र भर मेरा ही रहने की 
कब क़सम ली थी ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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