*मुक्त-मुक्तक : 712 - बल्ब के काँच से पतले.....


नाम ठोकर का भी ले दो 
तो टूट जाते हैं ॥
बल्ब के काँच से पतले 
वो फूट जाते हैं ॥
जब भी मिलते हैं किया
 करते बात मरने की ,
और दे दो जो इजाज़त
 तो रूठ जाते हैं ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति


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आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (18-05-2015) को "आशा है तो जीवन है" {चर्चा अंक - 1979} पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक
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धन्यवाद ! मयंक जी !

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