*मुक्त-मुक्तक : 707 - बाज का भी बाप ॥


जिस्म से लेकर के की है
रूह तक की माप ॥
आदमी क्या हो ?
बताएँगे हमें क्या आप ?
दिखने में गौरैया ,मैना ,
फ़ाख़्ता ,बुलबुल -
अस्ल में है गिद्ध ,चील औ
बाज का भी बाप ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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