*मुक्त-मुक्तक : 706 - क़ैद-ओ-क़फ़स........


मत घोंसले को
क़ैद-ओ-क़फ़स का तू नाम दे ॥
मत गुफ़्तगू को
तल्ख़ बहस का तू नाम दे ॥
करता हूँ मैं जो उससे दिल-ओ-
जान से मत उस ,
पाकीज़ा मोहब्बत को
हवस का तू नाम दे ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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