*मुक्त-मुक्तक : 708 - बस मोहब्बत ही करूँ ॥


न कहीं चुगली तेरी 
न तो शिकायत ही करूँ ॥
मारना चाहूँ मगर 
सच्ची हिफ़ाज़त ही करूँ ॥
सच कहूँ तो 
क़ाबिले नफ़्रत है तू लेकिन मेरी –
बेबसी ऐसी है 
तुझको बस मोहब्बत ही करूँ ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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