*मुक्त-मुक्तक : 704 - सचमुच आरामदेह है.......



नर्म गद्दे पे छाई

नर्म रेशमी चद्दर ॥

सचमुच आरामदेह है

बहुत मेरा बिस्तर ॥

चूर थककर हूँ

नींद भी भरी है आँखों में ,

फिर सबब क्या है

जो मैं बदलूँ करवटें शब भर ?

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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