*मुक्त-मुक्तक : 703 - ऐश-ओ-आराम की चाहत.....


ऐश-ओ-आराम की चाहत
अज़ाब से पूरी ,
आब-ए-ज़मज़म की ज़रूरत
शराब से पूरी ,
तुझको बतलाएँ क्या
कि कैसे-कैसे की हमने ?
आह ! तेरी तलब हमेशा
ख़्वाब से पूरी !
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

Comments

Popular posts from this blog

विवाह अभिनंदन पत्र

विवाह आभार पत्र

सिर काटेंगे