*मुक्त-मुक्तक : 700 - फ़ौलाद मोम सा पिघले ॥


कभी जो बर्फ़ में फ़ौलाद
मोम सा पिघले ॥
ग़ज़ाल शेर को
ज़िंदा पटक उठा निगले ॥
भुला चुका हूँ उन्हें
तुम ये मानना उस दिन ,
कि जिस भी दिन
न मेरी आँख से दर्या निकले ॥
( ग़ज़ाल=हिरण का बच्चा , दर्या=नदी )
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

Comments

Kavita Rawat said…
बहुत खूब!

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