*मुक्त-मुक्तक : 698 - मैं फ़क़ीर हुआ ॥


वो मुझसे तब कहीं ज़रा 
असर-पज़ीर हुआ ॥
अमीर-ऊमरा से जबकि
 मैं फ़क़ीर हुआ ॥
किया तभी है उसने मुझको 
दिल में क़ैद अपने ,
जब उसकी ज़ुल्फ़ का मैं 
बेतरह असीर हुआ ॥
( असर-पज़ीर=प्रभावित ,अमीर-ऊमरा=धनवान ,असीर=क़ैदी )
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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