*मुक्त-मुक्तक : 696 - मौसम बर्फ़बारी का.......



बड़े ही नाज़ – ओ – अंदाज़ से बेहद क़रीने से ॥
टिका रक्खा था उसने अपने सर को मेरे सीने से ॥
यक़ीनन वादियों में था वो मौसम बर्फ़बारी का ,
मगर उस वक़्त लथपथ हो रहा था मैं पसीने से ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

Comments

Kailash Sharma said…
बहुत सुंदर..
धन्यवाद ! Kailash Sharma जी !

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