*मुक्त-मुक्तक : 694 - बेपेंदी का लोटापन ॥


खरे–खरे दिखने वालों में
दिखा मुझे इक खोटापन ॥
बड़े बड़ों में हुआ दृष्टिगत
बड़ा-बड़ा सा छोटापन ॥
ऊपर से तालाब, झील, नद,
कूप से लगने वालों के –
तल में पाया रिक्त लुढ़कता
बेपेंदी का लोटापन ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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