*मुक्त-मुक्तक : 692 - मेरा मुखड़ा चाँद का टुकड़ा.........


मेरा मुखड़ा चाँद का टुकड़ा नहीं

किन्तु इसमें क्षण-क्षण ॥

जब देखूँ तब दिखता

मेरे हर प्रतिबिंब में आकर्षण ॥

सच्चे जग में मुझे प्राणप्रिय

इसीलिए तो लगता है ,

मेरा टूटाफूटाधुँधला

चापलूसझूठा-दर्पण ॥


-डॉ. हीरालाल प्रजापति

Comments

Popular posts from this blog

विवाह अभिनंदन पत्र

विवाह आभार पत्र

मुक्त ग़ज़ल : 267 - तोप से बंदूक