*मुक्त-मुक्तक : 690 - कोई भी न जिस्म से पूरा........



कोई भी न जिस्म से पूरा सारे औने-पौने लोग ॥

ऊँची-ऊँची मीनारों पर चढ़ तब क़द के बौने लोग ॥

सारे शह्र में अफ़रा-तफ़री फैला देते हैं चुपचाप –

जब आते हैं खोल ओढ़कर शेरों के ,मृगछौने लोग ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति


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