161 : मुक्त-ग़ज़ल - छुपाने की कोशिश ॥



नुमूदार को ना दिखाने की कोशिश ॥
दिखाने की है सब छुपाने की कोशिश ॥
ये क्या है अड़ा टाँग पहले गिराकर ,
बहुत प्यार से फिर उठाने की कोशिश ?
ये दे के क़सम तुमको हम ना भुलाएँ ,
हमें याद कर-कर भुलाने की कोशिश ॥
कि दफ़्तर में अफ़सर की हर मातहत को ,
पले बंदरों सा नचाने कि कोशिश ॥
वो तालीम क्या जिसमें बचपन से बच्चों को ,
होती है बूढ़ा बनाने की कोशिश ?
( नुमूदार=प्रकट ,तालीम=शिक्षा )
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

Comments

Popular posts from this blog

विवाह अभिनंदन पत्र

विवाह आभार पत्र

मुक्त ग़ज़ल : 267 - तोप से बंदूक