*मुक्त-मुक्तक : 680 - नर्म-आसाँ था पहले............


नर्म-आसाँ था पहले आज सख़्त-मुश्किल हूँ ॥
पहले वीरान था अब पुरशबाब महफ़िल हूँ ॥
वक़्त-ओ-हालात ने घिस-घिस के कर दिया पैना ,
पहले मक़्तूल था अब खौफ़नाक-क़ातिल हूँ ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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