*मुक्त-मुक्तक : 674 - तेरे जलवों की..........


नहीं मेरे अकेले की 
ये लाखों की 
हजारों की ॥
तेरे जलवों की 
तेरे दीद की 
तेरे नज़ारों की ॥
बख़ूबी जानते हैं 
तू कभी आया 
न आएगा ,
सभी को है मगर 
आदत सी 
तेरे इंतज़ारों की ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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