*मुक्त-मुक्तक : 673 - सरे बज़्म मेरी बाहों में.........


सरे बज़्म मेरी बाहों में 
आकर के झूम ले
तनहाई में पकड़ के 
मेरा हाथ घूम ले
बेशक़ ! बशौक़ दे दे फिर
 तू मौत की सज़ा ,
सिर्फ़ एक बार तह-ए-दिल
 से मुझको चूम ले
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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