अकविता (8) - कितना अच्छा था वह ?


उसके मरने के बाद -
कितना क़ीमती था वह ?
कितना उपयोगी था वह ?
कितना अच्छा था वह ?
और भी न जाने क्या-क्या वह था ?
जो उसे मैंने कभी नहीं समझा ,
कभी नहीं कहा -
पता चला ।
-डॉ. हीरालाल प्रजापति


Comments

Popular posts from this blog

विवाह अभिनंदन पत्र

विवाह आभार पत्र

मुक्त ग़ज़ल : 267 - तोप से बंदूक