Friday, January 2, 2015

*मुक्त-मुक्तक : 656 - मत भरो आह........


मत भरो आह न तुम सिसको ना कराह करो ॥
बल्कि सच क़हक़हा लगाओ वाह - वाह करो ॥
मुझको मिटने में भी बनने सी ही ख़ुशी होगी ,
शौक़ से तुम ही बशर्ते मुझे तबाह करो ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति  

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मुक्तक : 941 - बेवड़ा

लोग चलते रहे , दौड़ते भी रहे ,  कोई उड़ता रहा , मैं खड़ा रह गया ।। बाद जाने के तेरे मैं ऐसी जगह ,  जो गिरा तो पड़ा का पड़ा रह गया ।...