*मुक्त-मुक्तक : 650 - तुम माँगते जो कंकड़........


तुम माँगते जो कंकड़ सच देता मैं नगीना ॥
तुम करते दिन तलब झट दे देता मैं महीना ॥
जब वक़्त मेरी मुट्ठी में था न आये तब तुम ,
तब क्यों न आये तुम जब तलवों में था दफ़ीना ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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