*मुक्त-मुक्तक : 649 - नकली तेल-डालडा............


नकली तेल-डालडा से असली घृत हो जाता ॥
कालकूट के जैसे विष से अमृत हो जाता ॥
तेरा मुझको छू लेना यदि संभव होता तो ,
मैं निर्जीव चिता पे लेटा जागृत हो जाता ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Popular posts from this blog

मुक्त-ग़ज़ल : 256 - मंज़िल

मुक्त-ग़ज़ल : 257 - मक़्बरा......

मुक्त ग़जल : 254 - चोरी चोरी