नवगीत ( 6 ) : अपना अहं घटा कर देखो.......


अपना अहं घटा कर देखो ॥
तुमको भी चहुंओर दिखेगा ,
विरल नहीं घनघोर दिखेगा ,
सूखा , पीला यदि आँखों से –
ऐनक हरा हटा कर देखो ॥
वह बच्चा मैला सारा है ,
पर अस्पृश्य नहीं प्यारा है ,
मात्र दृष्टि से घृणा हटा कर –
छाती से लिपटा कर देखो ॥
बीच राह में आते जाते ,
शक्तिहीन को क्या धमकाते ,
जो तुमसे बलवान शत्रु हो –
उसको धूल चटा कर देखो ॥
रावण को भी राम कहेगा ,
कंस को कृष्ण न श्याम कहेगा ,
वह मति मूढ़ नाम जप धुन में -
शुक को राम रटा कर देखो ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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