गीत ( 3 ) : एक बार बतलाओ...........



डर किसका था तुमको ?
क्यों मुझसे पूछा न -
एक बार बतलाओ ?
तुम मुझपे मरते रहे ,
बिन पूछे करते रहे ,
चाँद को चकोरे सा
क्यों ये प्यार बतलाओ ?
सोची न युक्ति कभी ,
चाही न मुक्ति कभी ,
कैसे होता भाटा
प्रेम ज्वार बतलाओ ?
तुम यों ही देते रहे ,
बिन दाम हम लेते रहे ,
कैसे होगा चुकता
ये उधार बतलाओ ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

pd antopd said…
सुन्दर हे
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (08-12-2014) को "FDI की जरुरत भारत को नही है" (चर्चा-1821) पर भी होगी।
--
सभी पाठकों को हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
Kavita Rawat said…
बहुत बढ़िया ....तस्वीर बहुत सुन्दर लगी ..
Unknown said…
बहुत सुंदर, प्रेम में उधारी कैसी।
Unknown said…
bahut hi sunder rachna va chitr
धन्यवाद ! Lekhika 'Pari M Shlok' जी !

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