*मुक्त-मुक्तक : 646 - अपना दूध–दही........


अपना दूध - दही गाढ़ा औरों का पनीला बोलेगा ॥

अपनी सब्ज़ी का रंग हरा शेष का पीला बोलेगा ॥
अपने कंठ को बेचने की दूकान लगाए तो निःसन्देह ,
अपना स्वर प्रत्येक गधा कोयल से सुरीला बोलेगा ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 


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