*मुक्त-मुक्तक : 644 - सीने में दिल.........


सीने में दिल सवाल उठाता है !!
मग्ज़े सर भी ख़याल उठाता है !!
सबके गुल पे ज़माना चुप मेरी ,
सर्द चुप पे बवाल उठाता है !!
(मग्ज़े सर = मस्तिष्क , गुल=हल्ला-गुल्ला )
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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