*मुक्त-मुक्तक : 643 - सिर्फ़ होती है ख़ता.......


सिर्फ़ होती है ख़ता या कि भूल होती है ॥
ये नगीना नहीं ये ख़ाक - धूल होती है ॥
मैंने माना कि मोहब्बत में तू हुआ है फ़ना ,
फिर भी मत कह कि मोहब्बत फ़िजूल होती है ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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