*मुक्त-मुक्तक : 642 - मेरे समझाने का.........


मेरे समझाने का अंदाज़-ओ-अदा समझे न वो ॥
चीख़ती ख़ामोशियों की चुप सदा समझे न वो ॥
बेवजह हँस-हँस के उनसे बातें क्या बेबात कीं ,
मैं नहीं रोया तो मुझको ग़मज़दा समझे न वो ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Popular posts from this blog

विवाह अभिनंदन पत्र

विवाह आभार पत्र

मुक्तक : 946 - फूल