*मुक्त-मुक्तक : 640 - एक-एक को दो........


एक-एक को दो-तीन बनाने की फ़िक्र में ॥
सीटी को बंस-बीन बनाने की फ़िक्र में ॥
ताउम्र फड़फड़ाता दौड़ता फिरा किया,
बेहतर को बेहतरीन बनाने की फ़िक्र में ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Kailash Sharma said…
बहुत सार्थक प्रस्तुति..

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