*मुक्त-मुक्तक : 638 - गर्मी में बरसात.......


गर्मी में बरसात हो जाये ॥
मँगते की ख़ैरात हो जाये ॥
वीराँ में तुझसे जो मेरी ,
कुछ अंदर की बात हो जाये ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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