*मुक्त-मुक्तक : 637 - उनके तो ले ही गये.....


उनके तो ले ही गये सँग में हमारे ले उड़े ॥
इक नहीं दो भी नहीं सारे के सारे ले उड़े ॥
हमने रक्खे थे अमावस की रात की ख़ातिर
जो जमा दीप , जो जुगनूँ , जो सितारे , ले उड़े ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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