*मुक्त-मुक्तक : 634 - चीज़ आड़ी सी.........


चीज़ आड़ी सी पड़ी भी खड़ी लगती है ॥
बूँदा - बाँदी बला की झड़ी लगती है ॥
दूर पास में पास दिखे है दूरी पर ,
आँखों में कुछ बड़ी गड़बड़ी लगती है ॥
डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (10-11-2014) को "नौ नवंबर और वर्षगाँठ" (चर्चा मंच-1793) पर भी होगी।
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चर्चा मंच के सभी पाठकों को
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
Umesh Charan said…
Bahot acha ji . . .

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