*मुक्त-मुक्तक : 631 - मेरी आँखों ने जो.......


मेरी आँखों ने जो कल अपलक निहारा है ॥
वो विवशताओं का उल्टा खेल सारा है ॥
है अविश्वसनीय,अचरजयुक्त पर सचमुच ,
एक मृगछौने ने सिंहशावक को मारा है ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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धन्यवाद ! Lekhika 'Pari M Shlok' जी !

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