*मुक्त-मुक्तक : 629 - साधु-संतों से............


साधु-संतों से जटा-जूट-मूँछ धारी में ॥
ईश्वरोपासना में रत-सतत पुजारी में ॥
काम का भाव लेश मात्र भी न था तब तक ,
तुझको देखा न था जब तक उ ब्रह्मचारी में ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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