*मुक्त-मुक्तक : 628 - ऊल कुछ कुछ जुलूल..........


ऊल कुछ कुछ जुलूल लगती हैं ॥
कुछ सरासर फ़िजूल लगती हैं ॥
उनको सब ही सही-सही मेरी ,
बातें गलती से भूल लगती हैं ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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