*मुक्त-मुक्तक : 475 - मल्हार से मैं.........


मल्हार से मैं दीप-राग में बदल गया ॥
ठस बर्फ़ से पिघलती आग में बदल गया ॥
जज़्बात का रहा न तब से काम कि जब से ,
सीने में दिल अदद दिमाग़ में बदल गया ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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