*मुक्त-मुक्तक : 621 - जितना तू चाहे..............


जितना तू चाहे सनम तक़्सीम कर ॥
चाहे ज़्यादा चाहे कम तक़्सीम कर ॥
बस मेरी बरदाश्त के मद्देनज़र ,
गर तुझे करना है ग़म तक़्सीम कर ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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