Friday, October 17, 2014

*मुक्त-मुक्तक : 620 - बनाने वाला ही...........


बनाने वाला ही मुझको तबाह करता है !
मिटाके आह न भर वाह-वाह करता है !
है मुझपे पूरा हक़-ओ-अख़्तियार जब उसका ,
सही है फिर वो कहाँ कुछ गुनाह करता है ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

2 comments:

Darshan jangra said...

बहुत सुंदर
आज हिंदी ब्लॉग समूह फिर से चालू हो गया आप सभी से विनती है की कृपया आप सभी पधारें

शनिवार- 18/10/2014 नेत्रदान करना क्यों जरूरी है
हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः35

डॉ. हीरालाल प्रजापति said...

धन्यवाद ! Darshan jangra जी !

मुक्तक : 941 - बेवड़ा

लोग चलते रहे , दौड़ते भी रहे ,  कोई उड़ता रहा , मैं खड़ा रह गया ।। बाद जाने के तेरे मैं ऐसी जगह ,  जो गिरा तो पड़ा का पड़ा रह गया ।...