*मुक्त-मुक्तक : 613 - मोमी तो अश्क़................


मोमी तो अश्क़ दरिया से 
बहा गए थे सच ॥
पत्थर की आँखों में भी अब्र 
छा गए थे सच ॥
इतनी थी उसकी दर्दनाक 
दास्ताँ कि सुन ,
दुश्मन के भी कलेजे मुँह को 
आ गए थे सच ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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