Thursday, October 9, 2014

* मुक्त-मुक्तक : 612 - तुझको रक्खेगा मुझसा.........


तुझको रक्खेगा मुझसा 
शाद कौन बतला दे ?
तुझको पूछेगा मेरे 
बाद कौन बतला दे ?
जैसे करता है रब के 
वास्ते कोई बंदा ,
तुझको मुझसा करेगा 
याद कौन बतला दे ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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मुक्तक : 941 - बेवड़ा

लोग चलते रहे , दौड़ते भी रहे ,  कोई उड़ता रहा , मैं खड़ा रह गया ।। बाद जाने के तेरे मैं ऐसी जगह ,  जो गिरा तो पड़ा का पड़ा रह गया ।...